लीजिए भाई, यूपी के नतीजे आ गए हैं... कई मित्र, जो फील्ड में घूम रहे थे, बीजेपी को 200 और ऊपर की सीटें बताने वालों को भक्त, बिकाऊ और पता नहीं क्या-क्या करार दे रहे थे... कुछ मित्र, जो बड़े मीडिया संस्थानों में काम करते हैं और ज़ाहिर है अपने को बड़ा पत्रकार मानते हैं और अपने नाम की ब्रांडिंग भी करने में पीछे नहीं रहते हैं, बीजेपी को तीसरे नंबर की पार्टी बता रहे थे और 120 और 80 सीट दे रहे थे...
वैसे तो इन मित्रों के पोस्ट और और आंकड़ेबाज़ी के स्क्रीन शॉट्स मैंने ले रखे हैं और पहले सोचा था कि लगाउंगा, लेकिन अब लगता है कि वो ज़्यादा पर्सनल हो जाएगा... लेकिन मैं उन मित्रों से एक ही बात कहना चाहता हूं कि आप बड़े मीडिया हाउस में हैं, केवल इसीलिए आप बड़े पत्रकार नहीं हो जाएंगे... पत्रकारिता के लिए विचार की ईमानदारी होनी पहली शर्त है...
और ये न कहिएगा कि ये केवल राजनीतिक आकलन का विषय था, जिसमें आप फेल हो गये... अगर सच में आप राज्य में घूम रहे थे, लोगों से बात कर रहे थे तो आपको 300 सीटों का आंकड़ा 80 या 120 नहीं दिख सकता था... बात सिर्फ इतनी है कि आप अपनी पत्रकारिता को अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता की मज़बूरी से बचा नहीं पा रहे हैं... तो आगे से जब आप अपने राजनीतिक विचार का कचरा फैलाएं, तो कृपया उसे पत्रकारिता की तश्तरी में न परोसें...
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